थाने सतगुरु मारे हैला रे , नर राम सुमिर नर गैला नाथजी भजन लिरिक्स
थाने सतगुरु मारे हैला रे , नर राम सुमिर नर गैला ।
सतगुरु आकार बाग लगाया, बीज बो दिया चेला ।
कच्चे पक्के का ध्यान ना राखे, फूल खिलया अलबेला ॥
कोडी कोडी माया जोड़ी , जोड़ भराया नर थैला ।
निकलाया सांस बिखर गयी देह , संग चलया ना ठेला ॥
एक डाल दो पक्षी बेठया, कोण गुरु कुन चेला ।
गुरु की करणी गुरुजी जागा , चेले की करणी चेला ॥
मन मिले का मैला करिये, चित मिले का चैला ।
कहे मच्छन्दर सुन जती गोरख, सबसे भला अकेला रे ॥
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Thaane Satguru Maare Hela Re, Nar Ram Sumir Nar Gaila.
Satguru aakar baag lagaaya,
Beej bo diya chela.
Kachche pakkhe ka dhyaan na raakhe,
Phool khilya albela.
Kodi kodi maya jodi,
Jod bharaya nar thaila.
Nikalaya saans, bikhar gayi deh,
Sang chalya na thela.
Ek daal do pakshi bethya,
Kaun guru, kun chela.
Guru ki karni Guruji jaaga,
Chele ki karni chela.
Man mile ka maila kariye,
Chit mile ka chhela.
Kahe Machchhandar sun jati Gorakh,
Sabse bhala akela re.
FAQs (थाने सतगुरु मारे हैला रे भजन लिरिक्स | नाथजी भजन):
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"थाने सतगुरु मारे हैला रे" भजन किसने लिखा है?
यह भजन नाथ संप्रदाय से संबंधित है, जिसमें मच्छन्दरनाथ और गोरखनाथ की वाणी झलकती है। -
यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?
यह भजन सतगुरु, गोरखनाथ और मच्छन्दरनाथ को समर्पित है। -
क्या यह भजन ध्यान के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह भजन ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के लिए बहुत उपयुक्त है। -
क्या BhaktiSongsLyrics.in पर यह भजन उपलब्ध है?
जी हाँ, इस भजन के लिरिक्स https://bhaktisongslyrics.in वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। -
इस भजन का क्या भावार्थ है?
यह भजन सांसारिक मोह, गुरु-शिष्य परंपरा और आत्मज्ञान के संदेश को दर्शाता है।
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